याद

अबके सावन हमको बहुत रुलाएगा
बात - बात में तेरी याद दिलाएगा

बारिश में जब भीगे भीगे फिरते थे
वो बचपन लौट के फिर ना आएगा

मन बेचैनी से तुमको फिर ढूंढेगा
बांह पकड़ के हमको कौन सिखाएगा

बाबा पापा सब नामकरण संक्षिप्त हुए    
अब रहा नहीं कोई जो हमें हंसाएगा

सपन -सलोने सारे सब खत्म हुए
खाली रातों में लोरी कौन सुनाएगा



अपने पिताजी  को समर्पित
आज मेरे पिताजी की बरसी पर  

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